The Post of 27 March 2026
کوئی تقدیر کی منطق سمجھ سکتا نہیں ورنہ
نہ تھے ترکان عثمانی سے کم ترکان تیموری
कहा जाता है कि भारत रत्न नरसिम्हा राव 18 ज़बान जानते थे मगर जाहिल ने हिन्दुस्तान का इतिहास और भूगोल नहीं पढ़ा था, जिस के कारण आज 34 साल से हिन्दुस्तान की आत्मा तेल और गैस के ईर्द गिर्द ही भटकती रही और देश विश्वगुरु न बन सका।
यूरोप में भी किसी देश में तेल या गैस नहीं है मगर सब अपने आस-पड़ोस से गैस या तेल का बंदोबस्त कर लिया है और किसी देश में भारत के तरह लोग पेट्रोल पम्प पर या गैस दुकानों पर लाईन लगा कर नहीं खड़े हैं और न सरकार को गाली दे रहे हैं।
आज जिस तरह से भारत में तेल और गैस के लिए लोग परिशान हैं, उस तरह से दुनिया का कोई देश परिशान नहीं है। बाक़ी तो आने वाला वक़्त बहुसंख्यक समाज के बुद्धिजीवियों के दिल मे रौशनी ला देगा।
अंधे दिल भारत रत्न राव पर इक़बाल का एक शेर जो बाबर (तुर्कान-ए-तैमूरी) से मंसूब है, नज़र करते है:
“कोई तक़दीर की मनतिक़ समझ सकता नहीं वरना
न थे तुर्काने उस्मानी से कम तुर्काने तैमूरी”

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