The Post of 1st April 2026

ट्रम्प के रात के भाषण से दुनिया के सभी लोग युद्धविराम की उम्मीद लगाये थे मगर हम को यक़ीन था कि ट्रम्प लड़ाई जारी रख ईरान को बर्बाद करने की बात करें गे।

*रूस-यूक्रेन जंग (2/22) के बाद मेरा कहना है कि 10/7 का नरसंहार अरब या मुस्लिम हुक्मरानों का प्रोब्लम नहीं रहा बल्कि यह अब यूरोप (पश्चिमी देशों) का प्रॉब्लम हो गया है क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध के 75 साल बाद 24 फ़रवरी 2022 को रूस ने यूरोप पर जंग थोप दिया।

*1923 के बाद पश्चिमी देश मुस्लिम देशों को मानवाधिकार, डेमोक्रेसी, औरतों की आज़ादी, आतंकी आदि इत्यादि का नारा लगा कर बेइज़्ज़त (demoralised) करते रहे मगर 2/22 के बाद जो खुल्लम खुल्ला क़त्ल-व-ग़ारत यूक्रेन में हुआ उस ने यूरोप के मानवाधिकार और LGBT के नारा को ख़त्म कर दिया क्योंकि पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था को कोरोना और जंग ने बर्बाद कर दिया।

*ट्रम्प के भाषण के पहले कल दिन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान “It is not our war” यानि जिस ने 1910 मे “फ़ादरलैंड” बनाने का प्रस्ताव दिया था, उस को अब “फ़ादरलैंड” से कोई सरोकार नहीं है।इस के पहले फ्रांस, स्पेन, इटली और दूसरे यूरोप के देशों ने ट्रम्प के इस जंग में अपना एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति नही देने की बात पब्लिक में कही है।

*ट्रम्प के भाषण से इस बात की पुष्टि है कि पश्चिमी देश चाहते हैं कि यह जंग लम्बी चले ताकि तेल और गैस क्राइसिस से पश्चिमी देशों और मदरलैंड में लोग “फ़ादरलैंड” से नफ़रत करने लगें और अंततोगत्वा पिंडदान हो जाये।

*अरब मुल्क भी ईरान के ड्रोन और मिज़ाईल से पिटने के बावजूद, इस जंग में ईरान के खिलाफ ट्रम्प का साथ इस वजह कर नहीं दे रहे हैं कि वह भी चाहते हैं कि तेल और गैस का क्राइसिस इतना बड़ा हो जाये कि पुरी दुनिया “फ़ादरलैंड” से नफ़रत करने लगे ताकि गया जी मे पितृपक्ष मे पिंडदान से किसी को एतराज़ न हो।

Note: पिंडदान के बाद मदरलैंड बहुत धूमधाम से “निकाह” करे गा क्योंकि आज Financial Times, London में तेल और गैस का जो ग्राफ़ छपा है उस से यह स्पष्ट है कि 6 दिसंबर 1992 के बाद भारत Open Market से तेल ख़रीदने के बावजूद अभी भी 45% तेल और 52% LNG गल्फ़ देशों से ही आयात करता है, जो इस जंग से बूरी तरह प्रभावित हो गया है।

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