The Post of 21 March 2026

ज़हीरउद्दीन मोहम्मद उर्फ़ बाबर (1483-1530) चंगेज खान (1162-1227) और तैमूर (1339-1405) के वंशज से थे और दोनों ही अपने-अपने समय में अजेय विजेता थे।

बाबर की मॉ निगार खानम मंगोल सरदार यूनुस खान की बेटी थी। निगार खानम चंगेज़ खांन की 14वी नस्ल थीं जबकि बाबर के वालिद उमर शेख मिर्ज़ा अमीर तैमूर के 5वी पुश्त थे।बाबर एक फातेह बादशाह ही नहीं था बल्कि एक वली भी था।

भारत ने बाबर के नाम से मंसूब बाबरी मस्जिद को संघ प्रमुख बालासाहब देवरस और भारत रत्न नरसिम्हा राव के अंधे दिल ने 1992 मे बम से उड़ा कर अरब देशों के तेल के subsidised और deferred payment सुविधा से हिन्दुस्तान को वंचित कर दिया और हिन्दुस्तान की आत्मा को “तेल और गैस” को 21वी शताब्दी में भटकती आत्मा बना दिया। 1993 से भारत open market से महंगा तेल और गैस खरीदता है।

बंगलादेश बन्ने के बाद,1973 इसराइल-अरब जंग के बाद तेल भारत के लिए भटकती आत्मा बना रहा।जयप्रकाश आंदोलन के बाद 1980 मे तेल का दाम $40 प्रति बैरल हो गया था।बाजपेयी, विदेश मंत्री (1977-80) हिन्दुस्तान की बर्बादी समझ गये थे जिस के कारण अरब देशों का भ्रमण कर भारत के हर राज्य में पासपोर्ट ऑफ़िस खोल कर भारतीय मज़दूरों को अरब भेजना सुलभ कर “विदेशी मुद्रा” ला कर भारत को बचा लिया।

1993 में गल्फ वार के बाद तेल का दाम गिर कर $12-15 प्रति बैरल हो गया था मगर पिछले 25 साल से तेल 70-125 डॉलर प्रति बैरल रहा है।अभी अमेरिका-इसराइल-ईरान जंग तेल के दाम को अगले 6-8 महीने तक अनिश्चित रूप से बढ़ा देगा। तेल के बढ़े दाम से हर चीज़ की क़ीमत बढ़े गी और इस का बुरा असर ऊर्जा के साथ साथ परिवहन, कृषि, उर्वरक तथा प्लास्टिक पर पड़े गा।

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने तेल पर €0.25 टैक्स कम कर दिया, स्पेन ने 50% टैक्स कम कर दिया है ताकि जनता को महंगाई का सामना नहीं करना पड़े। मगर भारत के आदरणीय मोहन भागवत की संघ की सरकार ने डीज़ल पर 22 रूपया, तेल पर 2.30 रूपया प्रति लिटर तथा गैस सिलेंडर पर 60 रूपया टैक्स बढ़ा 80 करोड ग़रीब जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा दिया है।

#NOTE: भारत अपनी ज़रूरत का 85-90% तेल और गैस विदेश से खरीदता है और अब तेल के बाज़ार की क़िस्मत ईरान के हाथ में है और अभी भी हिन्दुस्तान की क़िस्मत ज़हीरुद्दीन मोहम्मद बाबर के हाथ में है।

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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman फ़ादरलैंड के वर्तमान साज़िशी जंग के कारण मदरलैंड का विकास 5-8 साल पिछे हो जाये गया। ईरान ने सभी मिडिल ईस्ट के देशों के तेल और गैस उत्पादन क्षमता को 20-25% अगले 2-3 साल के लिए ख़त्म कर दिया है।आज जंग ख़त्म हो जाती है तब भी तेल और गैस का दाम कम होने की उम्मीद नहीं है। फ़ादरलैंड के जंग का असर मदरलैंड जैसे बड़े आबादी वाले देश पर बहुत बुरा पड़ रहा है और भविष्य में और भी बूरा पड़े गा क्योंकि चीन एक वैश्विक शक्ति बन कर हमारे पड़ोस में विस्तारवादी हो गया है।