The FB Post on 16 May 2026

आज मशहूर अर्थशास्त्री रघुराम राजन का एक लेख Geopolitics पर Financial Times, London मे छपा है।

राजन ने लेख अर्थशास्त्री के तरह नहीं लिखा है बल्कि एक Social Scientist के तरह लिखा है जिस का शीर्षक है “हमारी कुत्ते जैसी नस्ल वाली सोंच को वर्ल्ड ऑर्डर पर सोचने की ज़रूरत है” यानि एक ताक़तवर आदमी दूसरे कमज़ोर को डरा कर पूरी दुनिया के सिस्टम को ख़त्म न करे, अपनी सोंच को बदले।

राजन ने लिखा है कि “आज, दुनिया के दो सुपरपावर देश सिर्फ अपना ख्याल रख रहे हैं।ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले से खाड़ी में जियोपॉलिटिकल असुरक्षा बढ़ गई है जिस के वजह कर हर जगह इकोनॉमिक इनसिक्योरिटी बढ़ गई है।चीन में घरेलू खपत कम हो गया है, तब भी चीन प्रोडक्शन बढ़ा कर दुनिया भर में सस्ते सामान की बाढ़ ला दिया है जिस के वजह कर दूसरे ग़रीब मुल्कों के प्रोडक्शन पर बुरा असर पड़ रहा है।”

राजन ने सुझाव दिया है कि दुनिया को यह पक्का करना होगा कि वह अमेरिका के मनमानी के आगे न झुकें ताकि कोई भी देश कंगाली में न जाए।उन्होंने लिखा है कि दुनिया को एक नए सिस्टम की ज़रूरत है, जो दूसरे मुल्क की आज़ादी या देशों के इकोनॉमिक सिस्टम में दखल न दें।

मेरा रघुराम राजन को सलाह है कि आप हिन्दुस्तान में पैदा हुऐ जिस की आबादी 140 करोड़ है मगर उस ने तो पिछले कई वर्षों में सारे भारतीय सिस्टम को ही खत्म कर दिया मगर आप या कोई दूसरा बुद्धिजीवी या पत्रकार भारत को सोंच बदलने के लिए नहीं कहा मगर आज चीन के सुपर पावर बन जाने पर आप सिस्टम की दोहाई दे रहे हैं।

राजन साहेब आज आप अमेरिका और चीन को दुनिया में ग़रीबी के लिए दोषी कह रहे हैं मगर 140 करोड़ के हिन्दुस्तान में जो पिछले दशकों मे Social Unrest कर दंगा करा कर GDP जलाने को आप क्यों नहीं दोषी कहते हैं।क्या हिन्दुस्तान में आप के तरह Social Scientists या Economists नहीं था या आज नही है जो हिन्दुस्तान को अमेरिका और चीन के तरह सुपर पावर बनाता?

#NOTE: रघुराम राजन अमेरिका और चीन को दोषी नहीं ठहराइये बल्कि भारत में अपने तरह सोंच को हर गली चौराहे पर फैलाइये ताकि इस बदली दुनिया में भारत में पैसा वाले मुल्कों से निवेश भारी मात्रा में आये वरना मेरी बात याद रखिये गा 21वी शताब्दी में भारत की आत्मा भटकती रहे गी क्योंकि 2014 के बाद दुनिया का geopolitics बहुत तेज़ी से बदला है और इस नये वर्ल्ड ऑर्डर में 140 करोड़ का भारत कहीं नही है।
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