The Post of 29 March 2026
मिडिल ईस्ट में संभावनाएं बहुत अधिक हैं, कृपया धैर्य रखें।
9/11 के बाद मिडिल ईस्ट की geopolitics बदलनी शुरू हुई और ओबामा तथा बाईडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल में बहुत तेज़ी से बदलाव आया। ट्रम्प के राष्ट्रपति बन्ने के बाद, मिडिल ईस्ट ने ट्रम्प की trillion dollar में बोली लगा कर दुनिया को देखा दिया के “there is potential in the Middle East.”
*अभी जो अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध चल रहा है उस से विचलित न हों।मेरा शुरू से कहना है कि मिडिल ईस्ट में यह correction होना ज़रूरी था और ट्रम्प (अमेरिका) अपनी बेवकूफी मे 28 फ़रवरी को जंग शुरू कर पूरा मिडिल ईस्ट को 1939 के बाद खो दिया और Post WWII और 1948 की दुनिया का अंत कर दिया।
*1957 के बाद, यूरोप के देश आपसी दुश्मनी भूल कर एक साथ होने लगे और तीस साल मे European Union बन कर 21 देशों की एक करेंसी Euro चलाया और currency exchange का झमेला खत्म किया। एक दूसरे के विश्वविद्यालयों मे Erasmus scholarship से उच्च शिक्षा का अवसर दिया, एक पासपोर्ट पर बिना विज़ा के एक दूसरे देशों में जा कर व्यापार की सुविधा दिया।
*मेरा मान्ना है कि ईरान जंग के बाद, पूरा मिडिल ईस्ट जिस में ईरान, मिस्र, तुर्की के एलावा पाकिस्तान, बंगलादेश, इंडोनेशिया वगैरह भी आपस में एक साझा “Economic Union” बनायें गें।
इस “आर्थिक यूनियन” का संबंध चीन के साथ बहुत घनिष्ठ होगा और भविष्य मे अरब देश चीन से मिल कर अपने सैन्य शक्ति का भी विकास करें गें क्योंकि अब अमेरिका-इसराइल-ईरान जंग से अरब देशों का अमेरिका (ट्रम्प) के सुरक्षा संबंध से विश्वास खत्म हो गया है।
*अगर ट्रम्प ने इसराइल को तीन तलाक़ देकर जंग जल्द खत्म नहीं किया तो तेल का दाम $150-180 प्रति बैरल हो जाये गा, जिस की वजह कर पूरी दुनिया में ट्रम्प (अमेरिका) के खिलाफ जलसा-जलूस निकलने लगे गा और अमेरिकी दूतावास कहीं भी सुरक्षित नहीं रहे गा।
*जिस तरह से 1973 अरब-इसराइल जंग के बाद 1974 मे सऊदी अरब ने Aramco में अपनी हिस्सेदारी 20% से बढ़ा कर 60% कर लिया और 1988 मे आरामको का उत्पादन और मैनेजमेंट अपने हाथ मे लिया उसी तरह से इस जंग के बाद सऊदी अरब तेल और गैस का Petrodollar के संबध को व्यापार में कम करे गा जिस से अमेरिका की अर्थव्यवस्था क़र्ज़ और ऋण से कमज़ोर हो जाये गा।
#Note: अब हारे हुऐ घोडा (अमेरिका) पर मिडिल ईस्ट के मोहम्मद बीन सलमान हों या क़तर के अमीर तमीम या कोवैत, बहरैन या यूएई के शेख कोई सवारी नहीं करें गा।
“ऐ हिन्द के फ़िरक़ा साज़ इक़बाल आज़ारी कर रहे हैं गोया
बचा के दामन बूतों से अपना ग़ुबारे राहे हेजाज़ हो जा”
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman
یہ ہند کے فرقہ ساز اقبال آزاری کر رہے ہیں گویا
بچا کے دامن بتوں سے اپنا غبار راہ حجاز ہو جا
मोहम्मद बदिउज़्ज़मॉ साहेब ने इक़बाल के इस शेर का मतलब लिखा है कि “ “ग़ुबारे राहे हेजाज़” से इश्क़ रसूल में फ़ना हो जाना मुराद है, क्योंकि “आज़री” यानि बुत परस्ती से बचने की यह वाहिद सबील है।
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