The Post of 2 May 2026

कल Salman Arshad साहेब ने अपने पोस्ट में लिखा कि “इजराइल को सबसे पहले मान्यता देने वाला देश था सोवियत संघ, जिसके हेड थे स्टालिन।जब अरबों ने इजराइल का विरोध किया और सैनिक कार्यवाही की तो सोवियत संघ ने इजराइल की मद्द् चेकोस्लोवाकिया के सैनिक से किया।”

उस पर Azaz Siddiqui साहेब ने हम से चार सवाल किया जिस का सवाल-जबाव निचे है:

1.क्या वजह है जो सोवियत फादरलैंड के साथ खड़ा था?: सोवियत संध इस वजह कर फ़ादरलैंड के साथ खड़ा रहा क्योंकि उस के यहॉ यहूदी आबादी बहुत थी और आज भी मोजूद है।सोवियत संध के चेकोस्लोवाकिया के राज्य Slovakia में आज भी बहुत ऊँचे पद पर यहूदी मौजूद हैं।

*लोगों को याद होगा गल्फ़ वार (1992) में सोवियत संध के विदेश मंत्री Eduard Shevardnadze यहूदी थे जो रात में टीवी पर प्रेसिडेंट बुश के खिलाफ बोल रहे थे और सुबह मे Georgia चले गये और अपने को जॉर्जिया का राष्ट्रपति घोषित कर दिया।

*आज रूस में चीन से सटे बोडर पर यहूदियों का एक Jewish Autonomous State Oblast (JAO) है जिस को प्रेसिडेंट स्टालिन ने 1934 मे बनाया था जिस का रक़बा 36271 sq.km है और जहॉ आज दुबई के तरह गगनचुंबी एमारत है और वहॉ केवल यहूदी रहते हैं।

*सोवियत संघ के सेंट्रल एशिया के मुस्लिम मुल्कों में भी यहूदी बहुत थे जो अब यूरोप, साइप्रस और अमेरिका चले गये।आज भी उज़बेकिस्तान के समरकंद में उन का क़बरिस्तान और Synagogue मौजूद है जहॉ हम 2019 मे गये थे और देखा।

2. सोवियत और अरब संबंध कैसे क्यों शक के दायरे में थे?: अरब इस वजह सोवियत संघ को शक से देखते हैं क्योंकि प्रेसिडेंट स्टालिन ने सऊदी अरब में 1924-1937 तक रहे सोवियत संघ के राजदूत करीम खाकीमोव (Karim Khakimov) को जद्दा से बुला कर 1938 मे फाँसी दे दिया और सऊदी अरब के बादशाह अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद ने ग़ुस्सा मे सोवियत संघ से रिश्ता खत्म कर दिया जो फिर सोवियत संध के टूटने के बाद 1992 में बहाल हुआ (मेरा इस पर दो पोस्ट zamaniyat पर मौजूद हैं)।

*करीम खाकीमोव के क़त्ल के बाद उसी साल 1938 में अमेरिका ने दुनिया का सब से बड़ा तेल भंडार का खोज सऊदी अरब के दम्माम में किया और फिर सऊदी अरब ने सोवियत यूनियन की तरफ़ अगले 54 साल 1992 तक मुड़ कर नहीं देखा।

*दूसरी वजह मिस्र के प्रेसिडेंट जमाल अब्दुल नासिर ने सोवियत संध से मेलेटरी संबंध बनाया था मगर 1967 के अरब-इसराइल जंग में सोवियत संघ ने मिस्र को अत्याधुनिक हथियार देने से इंकार किया। बाद में प्रेसिडेंट अनवर सादादत ने 1972 मे सोवियत यूनियन की 20,000 फ़ौज को मिस्र से निकाल फेंका।आज भी सोवियत यूनियन का मिस्र की राजधानी क़ाहिरा के बाहर Military Bases का विरान आलिशान एमारत चहारदीवारी के साथ मौजूद है। जिस को हम ने 2010 मे देखा है, उस वक़्त तक मिस्री हकूमत ने उस को आबाद नहीं किया है।

3. अरब मुमालिक सोवियत के बनिस्बत वेस्ट को क्यों तरजीह दिए थे: 1917 से सोवियत संघ कम्युनिस्ट होने के बावजूद मुस्लिम विरोधी रहा हैं। जिस तरह से हिटलर ने यहूदी और क्रिसचन को मारा उस से ज़्यादा स्टालिन ने मुस्लिम का क़त्ल-आम किया। आज भी सत्तर साल बाद यूक्रेन से सटा मुस्लिम राज्य Crimea के मुस्लिम लोग स्टालिन का ज़ुल्म भुगत रहे हैं।

*प्रेसिडेंट स्टालिन अगस्त 1949 मे कज़ाखस्तान में खुले मैदान मे Atomic Bomb का टेस्ट किया जहॉ आज भी बच्चे अपंग पैदा होते हैं और हज़ारों लोग कैंसर से मर गये।

*अरब दुनिया यह सब ज़ुल्म जानती थी, इस वजह कर सोवियत संघ को तरजीह नहीं दिया और जब सोवियत यूनियन 1979 में अफ़ग़ानिस्तान क़ब्ज़ा किया तो अरब ने वेस्ट के सपोर्ट से सोवियत यूनियन को 1990-92 मे तोड़ डाला।

*सोवियत संध टूटने से 6 मुस्लिम मुल्क Kazakhstan, Kyrgyzstan, Tajikistan, Uzbekistan, Turkmenistan, Azerbaijan और यूरोप और एशिया के दूसरे 8 मुल्क आज़ाद हुआ (निचे तस्वीर देखें)।

4. Egypt और फादरलैंड की 6 दिन की लड़ाई में सोवियत का रोल क्या था?: 1967 के 6 दिन वाले मिस्र-इसराइल जंग में सोवियत का रोल बहुत गंदा था जिस का हम ने ऊपर तज़किरा किया है। यही वजह थी के जब 1970 मे मिस्र के प्रेसिडेंट नासिर मरे तो प्रेसिडेंट अनवर सादात ने सोवियत संघ को मिस्र से निकाल बाहर किया और अमेरिका से दोस्ती की क़दम बढ़ाया।

*1956 मे जब प्रेसिडेंट नासिर ने Suez Canal nationalise किया था तो अमेरिका ने मिस्र का साथ दिया था और इंग्लैंड-फ्रांस को सपोर्ट नहीं किया था।


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