The Post of 20th April 2026
अमेरिका, इसराइल, ईरान के बीच संघर्ष अभी अपने चरम पर नहीं पहुंचा है, यह अभी बढ़ेगा।
ईरान नहीं छूके गा क्योकि ईरान इस बार मिडिल ईस्ट मे #फैसला करा कर रहे गा।यह संघर्ष उस वक़्त शांत होगा जब ट्रम्प के बेवक़ूफ़ी की वजह कर तेल, गैस और फर्टिलाइजर्स का दाम आसमान छूने लगे गा।
होर्मुज़ स्ट्रेट के लगातार बंद होने से एनर्जी की कीमतें बढ़ती रहेंगी।जेट फ्यूल की कमी से यूरोप और अमेरिका के एयरलाइंस कुछ हफ़्तों में अपनी उड़ान रद्द करने लगे गें। दुनिया भर के किसान फर्टिलाइज़र की बढ़ती कीमतों से परेशान होना शुरू हो गये हैं, और इसका असर जल्द ही खाने की चीज़ों की कीमतों पर पड़ेगा।
लेकिन मेरा मानना है कि लड़ाई और बढ़ेगी और दुनिया की इकॉनमी इस संकट का सबसे बुरा दौर देखी गी।
#NOTE: ट्रम्प के बेवक़ूफ़ी की वजह कर दुनिया की इकॉनमी बातचीत के नतीजे आने के लिए महीनों इंतज़ार नहीं करे गी।ट्रम्प और अमेरिका के खिलाफ दुनिया में नफरत बढ़े गा।ट्रम्प किसी भी समझौता पर पहुँचने के लिए मजबूर हो जाये गें और ईरान के terms पर उन को समझौता करना होगा।
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Some comments on the Post
Parmod Pahwa सर जिसे हम ट्रंप की बेवकूफी समझ रहे हैं शायद वो उसकी स्क्रिप्ट का हिस्सा है जिसकी वजह से उसे प्लांट किया गया था। क्रूड ऑयल का टारगेट प्राइज 150 $ होने की बात हमने शुरू में ही लिखी थी।न्यू वर्ल्ड ऑर्डर के लिए पुराने को डिमोलिश करना ही पड़ेगा और ये उसी दिशा में बढ़ रहे है, नई खेमेबंदी हो रही है और अचानक दुनियां बदली हुई नजर आएगी
- Mohammed Seemab Zaman, Parmod Pahwa साहेब सही कहा आप ने क्रूड ऑयल का दाम $150 कहा था, जो सच होता नज़र आ रहा है।
- 2014 में संघ की सरकार के बनने से demolition बहुत तेज़ी से हुआ और 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूरोप पर जंग थोप कर न्यू वर्ल्ड ऑर्डर show कर दिया। Historian लिखें गें कि संघ की सरकार की वजह कर दुनिया 12 साल में बदली वरना यह 2035-2040 तक बदलती जिस में भारत भी एक actor होता। मगर भारतीय बुद्धिजीवी लोगों ने संघ की सरकार बनवा कर भारत को भटकती आत्मा बना दिया।
- Kamil Khan, Parmod Pahwa तेल मंहगा होने से तो चीन ही फ़ायेदे में रहेगा, बल्कि यूँ कहूंगा चीन ने पहले से सारी तयारी की हुई है, चीन ने यूरोप अफ़्रीक़ा गल्फ तक पहुँचने के तमाम रास्ते बनाये हुए हैं, तेल से मालामाल हर देश से अच्छे रिश्ते बनाये हैं, रूस सेंट्रल एशिया मिडिल ईस्ट रूस ईरान पाकिस्तान हर जगह चीन ने सड़क और रेल से पहुँचने ऑप्शन रख छोड़ा है.
Irfan Zibran फ़लस्तीन बन गया तो चीजें बेहतर हो जाएंगी।अगर शांति से नहीं बना तो पश्चिम एशिया में कभी न कभी बड़ा वॉर तय है जो कि फ़लस्तीन के लिए होगी।
- Mohammed Seemab Zaman मेरे हिसाब से बहुत बड़ा वार नहीं होगा, बहुत क़त्ल व ग़ारत हो चूका। सीरिया के तरह swift action होगा।
MD NoorMohammad Hashmi सर आप के हिसाब से ए सम्झौता होने मे कितना वक्त लगेगा
- Mohammed Seemab Zaman मई-जून तक होगा।
Dilawar Khan जी बिल्कुल सही कहा आपने सर,, ईरान अमेरिका के बीच संघर्ष अपने पीक पर पहुंचेगा,,, अभी दुनिया को झटका लगना जरुरी है,,, यूरोप मे जेट ईंधन खत्म होने वाला है,,, अमेरिका का साथ कोई भी देश नहीं दे रहा है,,, ये इस जंग की बहुत बड़ी कामयाबी है,,,, इस जंग से अरब देश भी बहुत होशियार हो गए है अब अरब देश विदेशों मे फूंक फूंक कर निवेश करेंगे,,, जिसकी वजह से दुनियां पर मंदी महंगाई बेरोजगारी का असर सदियों तक रहेगा,,,, अब चीन रूस ईरान के ज़रिए अमेरिका को कमज़ोर करना चाहते है,,, इस जंग से ट्रंप ने अपनी छवि बर्बाद कर ली
- Mohammed Seemab Zaman अरब मुल्कों में correction होना बहुत ज़रूरी है और इस जंग से हो गया। अब अरब मुल्क फूँक-फूंक कर निवेश करे। गें और अपने यहॉ secure and long term development करें गे। चीन को विश्वगुरु बना कर वहॉ इस्लाम फैले गा।
Kamil Khan यहाँ संघी बुद्धि जीवी पर कुछ बोलना ही बेकार है, यहाँ लिबरल बुद्धि जीवी अभी इजराइल को बहुत बड़ी तोप समझ रहे हैं, जबकि फेवर ईरान का ही कर रहे हैं, मेरा सवाल है अगर इजराइल इतनी बड़ी तोप है तो यूरोप ने इजराइल को क्यों छोड़ दिया, अमेरिका की तो फिलहाल मजबूरी है इजराइल के साथ खड़े होना, क्योंकि एशिया अफ़्रीक़ा यूरोप वाले अब कोई अमेरिका के फेवर में नहीं, ज्योनिस्ट और भारत के संघी छोड़ कर, और इन संघियों पर अमेरिका भरोसा नहीं कर सकता, न इनके पास पैसा है न इनके पास जिगर है, ये देसी राजनीति में खुद को गर्क़ कर रहे हैं.
Syed Shaad सर क्या नेतनयाहू ट्रंप की ईरान के साथ सारी शर्ते मानकर उसके साथ समझौता करने की बात को आसानी से मानेगा… नेतनयाहू का हाल तो अब उस राजा की हो गई है जिसकी जान तोते में अटकी थी।
Arif Kamal आपकी आख़िरी दो लाइन पढ़ कर दिल खुश हो गया ।
Parvez Ali आप को जब पढ़ना शुरू किया था तब कुछ बातों पर शक होता था, मगर जब युद्ध war चालू हुआ तो मेने अपने जानने वालों से कह दिया कि अमरीका की अब गुंडागर्दी खत्म होने वाली है
मेरे को सब कहने लगे कैसे ? मैने कहा मोबाइल के भी कान है तुम एक महीने बाद देख लेना
i hope इधर विश्गुरु चलने को तैयार हो रहे हैं ![]()
- Mohammed Seemab Zaman आप ने बहुत शांदार जवाब दिया, “मोबाइल को भी कान है”
BM Prasad Perfectly factual assessment
- Mohammed Seemab Zaman Thanks Sir

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