The Post of 19 April 2026
1950 के दशक के “Green Revolution” ने दुनिया को सब से ज़्यादा बदला है।1950 के दशक के बाद से, ज़्यादा पैदावार वाली नई फसलों की किस्मों, सिंथेटिक फर्टिलाइज़र, केमिकल पेस्टिसाइड और बड़े पैमाने पर Pump द्वारा सिंचाई ने गेहूं और चावल जैसी मुख्य फसलों के प्रोडक्शन में तेज़ी ला दी।
भारत, जो ग्रीन रेवोल्यूशन के मुख्य केन्द्र में से एक था, उस ने 1970 के दशक की शुरुआत में गेहूं का प्रोडक्शन दोगुना से भी ज़्यादा कर दिया।1950 के पहले किसान गोबर और कम्पोस्ट पर निर्भर थे मगर 1950 के बाद ज़्यादा पैदावार पम्प वाली सिंचाई सुविधाओं और सिंथेटिक फर्टिलाइज़र के इस्तेमाल से हुआ।
ग्रीन रेवोल्यूशन ने फ़ूड प्रोडक्शन और फॉसिल फ्यूल इंडस्ट्री के बीच एक लिंक बनाया। इंडस्ट्रियल फर्टिलाइज़र, खासकर यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट जैसे नाइट्रोजन-बेस्ड प्रोडक्ट्स प्राकृतिक गैस से बनते हैं।
पिछले दो दशकों में, सऊदी अरब, कतर और यूएई ने ग्लोबल फ़ूड इकॉनमी में अपनी मज़बूत पहचान बना लिया। अरब मुल्क अब बड़ी मात्रा में फर्टिलाइजर निर्यात कर फ़ूड प्रोडक्शन और सर्कुलेशन को कंट्रोल कर Food Economy में अपनी एक ज़बरदस्त पहचान बना लिया है।
अमोनिया और सल्फर जैसे केमिकल खेती के लिए बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि उन्हें बड़े पैमाने पर खाद में बदला जाता है।अरब के ज़्यादा तर मुल्क अमोनिया से यूरिया खाद बनाते हैं।दुनिया भर के यूरिया ट्रेड में अरब मुल्कों की हिस्सेदारी 35% है; सऊदी अरब 2024 में दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया निर्यातक था, जबकि ओमान तीसरे नंबर पर था।
अभी जो अमेरिका-इसराइल-ईरान जंग ट्रम्प ने शुरू किया है उस से दुनिया के Food Production पर बहुत बुरा असर पड़े गा ख़ास कर भारत, अफ्रिका और यूरोप के मुल्कों में क्योंकि Hormuz Strait के बंद होने से फर्टिलाइजर्स की आपूर्ति अरब देशों से बंद हो गई है।अगर यह लड़ाई लम्बी चली तो दुनिया मे Food Crisis पैदा हो जाये गा।
#NOTE: नीचे FT, London का ग्राफ़ देखें, जो दर्शाता है कि दुनिया के दस बड़े फर्टिलाइजर्स import करने वाले देश जैसे चीन, भारत, इंडोनेशिया, अमेरिका वगैरह अरब देशों के sulphur, urea और ammonia fertiliser पर निर्भर हैं।
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Some comments on the Post
Mohammed Seemab Zaman *उर्दु नाम वाले जिन की ऑंख नहीं दिल अंधा है, जो अरब को गाली-गलौज करते हैं और कहते हैं कि क्या किया? वह दिल के अंधे देख लें अरब के बादशाह दुनिया को केवल उर्जा (तेल और गैस) ही नहीं बेचते हैं बल्कि फर्टिलाइजर्स भी उपलब्ध कराते हैं ताकि भारत ऐसे बड़े देश में लोग भुखमरी से न मरें।
*जो उर्दु या हिन्दी नाम वाले अरब से नफ़रत करते हैं वह देखे अगर अरब fertiliser और तेल और गैस की आपूर्ती बंद कर दें तो भारत की 140 करोड़ आबादी भुखमरी का शिकार हो जाये गा, जो अभी 80 करोड़ ग़रीब है।
*लोगों को याद होगा दस दिन पहले फ्रांस के राष्ट्रपति मैकरोन ने ईरान के राष्ट्रपति को फ़ोन कर कहा कि मेरा एक जहाज़ होर्मुज़ में फँसा है कृपया निकाल दें वरना फ्रांस मे Food scarcity हो जाये गी। ईरान के राष्ट्रपति ने फर्टिलाइजर से भरा फ्रांस का जहाज़ को होर्मुज़ से जाने की एजाज़त दे दिया।
- Shekh Shakil Alam, Mohammed Seemab Zaman सर क्या बात अंधों के शहर में सही चश्मा आप ही देते है खैर सर हिन्दी नाम वालो के साथ साथ उर्दू नाम वालो का आंख अंधा नहीं आंख ही बह गया है। अब आंख रहे तो ना आप या कोई आदमी इलाज कर सकता फिर बहुत सराहनीय कार्य है आप का



- Shadab Samar, Mohammed Seemab Zaman मामा, बेहतरीन जानकारी।शायद उर्दू नाम वाले लोग अरब मुल्कों से और भी ज्यादा उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वो मुल्क के उनके अंदरूनी मामलात में भी दख़ल देगा।
- Mohammed Seemab Zaman, Shadab Samar साहेब, आप ने सही कहा उर्दु नाम वाले यही उम्मीद रखते हैं कि वह उन के अंदरूनी मामला में दख़ल दे। जब की उन को अच्छी तरह मालूम है कि ऐसा कोई मुल्क दुनिया में directly नहीं करता है। Indirectly तो वह investment नहीं करते ही हैं, और तेल या गैस में कोई रियायत नहीं करते हैं। करोड़ लोग को नौकरी दिये हुऐ हैं वह यह भूल जाते हैं।
Dilawar Khan जी,, बहुत सही लिखा आपने सर,,
अभी गल्फ देशों ने ट्रंप से बात करते हुए कहा है कि जंग लंबी चली तो दुनियां में फूड क्राइसिस हो जायेगा,,,,
सर,, कतर चिप बनाने वाली गैस का बड़ा सप्लायर है जो कि हॉर्मूज बन्द होने की वजह से दुनियां पर संकट आने का खतरा बना हुआ है
- Mohammed Seemab Zaman क़तर Helium gas बेचता है जो चिप्स बनाने में काम आता है। दुनिया में दो मुल्क इस को supply करता है, एक क़तर और दूसरा अमेरिका।
Khursheeid Ahmad बीस साल पहले सऊदी अरब में आम नहीं होता था विदेशों से आता था आज नजरान इलाका आम पैदावार का केंद्र है. इस समय चीकू का पेड़ लगाने पर जोर है. कतर में हर तरह की सब्ज़ियां उगाई जा रही हैं भारत में नकली पनीर की खबरों के बीच हम लोग लोकल कंपनियों की पनीर खरीदते हैं. मीठे पानी की मछलियों में मिस्र ने भारत व बंग्लादेश को पीछे छोड़ दिया है.
- Mohammed Seemab Zaman Milk and milk products क्यों भूल गये? सऊदी अरब और क़तर दूध-दही में आत्मनिर्भर ही नहीं हुआ बल्कि export कर रहा है। हम लोग “गौ माता” का नारा लगाते हैं मगर दुनिया का सब से बड़ा Integrated Dairy Plant सऊदी अरब में हैं।
Tur Khan अभी कुछ दिन पहले ही हम कुछ लोग बैठे हुए बातें कर रहे थे कि मुस्लिम मुल्कों से और होर्मूज़ के बंद होने से कुछ अल्पसंख्यकों और सभी बहुसंख्यकों को ये पता चल जाएगा कि क्या क्या नहीं आता है और किस किस चीज़ के लिए हम लोग मुस्लिमों पर निर्भर हैं।
- Mohammed Seemab Zaman यह article हम Financial Times में देख कर खुद चौंक गये। हम तो यही जानते थे की लोग अरब मुल्कों से crude ले जा कर अपने यहॉ fertilizer और Diesel Pump से सिंचाई कर अनाज पैदा करते हैं मगर पता यह चला कि यह लोग Sulphur, Urea, Ammonia fertiliser भी बना कर दुनिया को बेचते है्ं।
Syed Shaad सर यहां के उर्दू नाम वाले अपने गांव/मोहल्ला, शहर, राज्य और देश की पॉलिटिक्स की समझ सही से रख ही नहीं पाते और अरब वर्ल्ड पर expert बने फिरते हैं। इतना कॉन्फिडेंस के साथ अरबों पर टिका टिप्पणी करते हैं मानो arab world पर phd कर के रखे हों। अपने परसेप्शन को फैक्ट बनाकर इस तरह पेश करते हैं कि लोग बाग आसानी से गुमराह हो जाते हैं।
सैफी आमिर, Mohammed Seemab Zaman सर आपकी पोस्ट आंखे खोलने के साथ साथ दिमाग भी खोल देती है अभी तक व्हाट्सएप जूनीभार्सिटी के प्रोफेसर ये ही ज्ञान देते थे कि हम आत्मनिर्भर बनेंगे लेकिन यूरिया की जानकारी के बाद तो सिर ही फोड़ लेंगे कि दुनिया का 35% यूरिया सिर्फ सऊदी अरब ही प्रोड्यूस करता है और जब ये पता चलेगा कि पूरे मुस्लिम मुमालिक से कितना यूरिया प्रोड्यूस होता है तब तो शायद सिर पीटने लगे इसी लिए कहा गया है पढ़े लिखो के साथ रही तो दुनिया की जानकारी मिले वर्ण कुएं के मेंढक बने रही
- Mohammed Seemab Zaman शुक्रिया। देख लिजये कितना झूठ मिडिया परोसती रहती है। यह लोग भारत का इतिहास और भूगोल याद नहीं रखते हैं और झूठ पर झूठ परोसते रहते हैं।

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