The Post of 11 April 2026

आज ईरान के वफ़द के हवाईजहाज़ की तस्वीर मेरे तीन दिन पुराने पोस्ट को याद करा रही है।जिस तरह से इक़बाल का शेर सौ साल बाद जंग तराबलस की याद दिलाता है वैसे ही इन ईरानी बच्चियों की तस्वीर सौ साल बाद की मिडिल ईस्ट की बदली हुई सुनहरी दुनिया में याद किया जाये गा।

فاطمہ! گوشبنم افشاں آنکھ تیرے غم میں ہے
نغمہ عشرت بھی اپنے نالہ ماتم میں ہے

इस पोस्ट को ईरान मे 200 बच्चियों के हलाकत के नज़र करते हुऐ इक़बाल की नज़्म “फ़ातिमा बिन अबदुल्लाह” के शेर से शुरू करते हैं।फ़ातिमा बिन अब्दुल्लाह वह लड़की हैं जो जंग तराबलस (1911) मे ग़ाजियों को पानी पिलाते शहीद हुईं,

“फ़ातिमा!गौ शबनम अफ़शा ऑंख तेरे ग़म में है
नग़मे इशरत भी अपने नायलह मातम में है”
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Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman पाकिस्तान मे “Islamabad Talks” ईरान के लिए कामयाबी की अलामत है, मगर यह इसराइली हुक्मरान इसराइल में अमन नहीं होने दें गें।

मेरा मान्ना है कि मुल्क इसराइल के हुक्मरॉ, यहूदी अमन नहीं चाहते हैं। वह इसराइल में रहना नहीं चाहते हैं, वह चाहते हैं कि वह लोग Western Countries यानि यूरोप और अमेरिका में जाकर बसें और रहें।

ग़ौर किजये जब से इसराइल 1948 में बना है, वह लाखों फलस्तीनयों को निकालने के बाद चैन से नहीं रहा। उस के बाद उस ने Greater Israel का नारा लगा कर मिस्र, सीरिया, लेबनान, जॉर्डन से जंग करता रहा और क़ब्ज़ा करता रहा। जब इस से थक गया तो खुद इसराइल का West Bank क़ब्ज़ा कर वहॉ क़त्ल-व-ग़ारत करता रहा।

अब इस सब से थक गया तो नया नारा तेल अवीव से जेरूसलम राजधानी बनाने का लगा कर ट्रम्प से जेरूसलम में अमेरिकी दूतावास खोलवा दिया। अब वह हो गया तो ग़ाज़ा मे नरसंहार कर दिया।

इन के साथ प्रोब्लम यह है कि अमेरिका और यूरोप नहीं चाहता है कि यह इन के मुल्कों में आकर बसें या रहें बल्कि वह इसराइल को लड़ाई का सामान दे कर उन को लड़वाता रहता है। ट्रम्प तो इन को अब ईरान से लड़वा कर पिटवाने और मरवाने लगा मगर इस बेवकूफ क़ौम को यह समझ मे नही आ रहा है कि ट्रम्प इन को मरवा रहा है मगर यह लेबनान में जंग कर हज़ारों लोगों को मार कर खुश हो रहे हैं।

ग़ौर से सोंचये गा एक 50,000 आबादी का छोटा Autonomous मूल्क Greenland शांति से रहना चाहता है। ऐसा ऐसा बहुत सा छोटा मूल्क दुनिया में है जो अपनी प्राचीन सभ्यता के साथ शांति से दूसरों के साथ रह रहा है, मगर इसराइल एक करोड यहूदी आबादी वाला मुल्क अपने हर पड़ोसी से 78 साल से दुश्मनी कर जंग ही कर रहा है।

#Note: बहुत अफ़सोस होता है इस क़ौम की सोंच और Doctrine पर। दुआ है ऊपर वाला इन के दिलों मे रौशनी दे और अच्छी अक़्ल और समझ दे ताकि यह अमन, चैन और सुकून से रहें।

  • Kamil Khan, Mohammed Seemab Zaman सर मेरे अब्बा कहते थे इस कौ़म को हज़रत मूसा अलै की बददुआ है, अगर ये बात सच है तो यहूदि यूँ ही दर बदर रहेंगे, इनके दिलों में रोशनी नहीं आ सकती
  • सैफी आमिर, Mohammed Seemab Zaman सर आपके इस कॉमेंट से कई लोगो का ध्यान एक ऐसे मुल्क पर गया जिसने 2014 के बाद जन्म लिया उसने भी इसी तरह के संबंध अपने पड़ोसियों से बनाए एक एक कर सारे पड़ोसी उसके मुखालिफ हो गए आज हालत ये है जिस देश को पहले ये 2014 के बाद वाला मुल्क आतंकवादी देश बताता था आज वही मुल्क अमेरिका इजराइल और ईरान की जंग का शांतिदूत बन गया नफरत इंसान को ही नही एक अच्छे भले शांति के प्रतीक मुल्क को भी दुनिया में अलग थलग कर ही देती है.

Kamil Khan ये बच्चों के स्कूल पे हमला अमेरिका इजराइल को बहुत भारी पड़ गया ईरान ने इसे मुद्दा बना दिया, इस ईरान सरकार को अपने देश में और विदेश दोनो जगह समर्थन मिलेगा,
नोट, खेमनाइ की मौत उन पर हमले को मुद्दा नहीं बनाया.