The POst on FB dated 10-04-2026

प्राचीन चाइनीज़ जेनरल और दार्शनिक सन त्ज़ु ने कहा था “जब आपका विरोधी गलती कर रहा हो तो उसे कभी न टोकें।”

  1. राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा, इस्लामोफ़ोबिया का झंडा लेकर 2010 में चले और अरब स्प्रिंग करा कर आठ अरब देश लिबिया, मिस्र, सुडान, यमन, सीरिया वगैरह में गृह युद्ध करा कर सब को 50 साल के लिए बर्बाद करने की ठानी मगर 2013 मे शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बन कर दार्शनिक सन त्ज़ु के strategy को अपना कर अपने विरोधियों को ग़लती करने दिया, उन को कभी नहीं रोका।
  2. दूसरी ग़लती ओबामा ने 2014 में भारतीय बहुसंख्यक समाज के अंधे दिलों से भारत में संघ की सरकार बनवा कर किया और शी जिनपिंग ने संध की सरकार accept कर झूला झूल लिया।
  3. तीसरी ग़लती 2017 मे ट्रम्प के राष्ट्रपति बन्ने के बाद हाऊडी मोदी, नमस्ते ट्रम्प था जिस का चीन द्वारा गलवान और अरूणाचल का नाम-पता बदल कर विस्तारवादी होना अंजाम हुआ।
  4. चौथा historical blunder बाईडेन 2022 जुलाई में अपने सऊदी अरब के दौरा पर मोहम्मद बिन सलमान से हाथ न मिला कर किया।यह वैसी ही ग़लती थी, जैसे 1954 मे जेनेवा मे वियतनाम सम्मेलन मे अमेरिका के विदेश मंत्री John Foster Dulles ने चीन के प्रधानमंत्री चाऊ एनलाई (Zhou Enlai) से हाथ नही मिला कर अमेरिका को वियतनाम वार मे झोंक कर अमेरिका को बरबाद किया था।

*शी जिनपिंग ने ओबामा के इसलामोफोबिसा का जवाब मलेशिया के महाथीर मोहम्मद के कहने पर दुनिया का सब से बड़ा Belt and Road Initiative योजना 2013 मे कज़ाखस्तान में शुरू किया, जो 60% मुस्लिम मूलकों से गुज़रता है।आज चीन मिडिल ईस्ट मे $270 billion बेल्ट और रोड में निवेश कर गल्फ देशों का एक महत्वपूर्ण अंग बन चुका है।

*शी ने तेज़ी से दुनिया के बदलते geopolitics को “पढ” लिया और मीडिल ईस्ट से गहरा संबंध बना लिया और मार्च 2022 मे “गुप्त मध्यस्थता” कर सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव को ख़त्म कर एक समझौता करा दिया और ईरान-चीन strategic partnership कर लिया।

*7 अकटूबर 2023 मे जब ग़ाज़ा मे नरसंहार शुरू हुआ तो शी जिनपिंग समझ गये कि यह नरसंहार “अमेरिक-ईरान” मे एक बड़े जंग की शक्ल लेकर खत्म होगा और वह पर्दे के पिछे ईरान की मद्द कर अपने विरोधी अमेरिका के “सुपर पावर” का ताज उछाल दें गें।

#NOTE: इतिहासकार जब 21वीं सदी की तारीख़ लिखें गें तो पहला नाम सुनहरे लफ़्ज़ों मे शी जिनपिंग, दूसरा ईरानी आयातुल्लाह अली खमेनाई और तीसरा नाम सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का लिखे गें जिस ने “America shortest lived superpower in history: 1991-2026” बना दिया।  
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Some Comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman चीन मिडिल ईस्ट में अशांति नहीं चाहें गें क्योंकि चीन ऊर्जा (तेल) के लिए गल्फ मुल्कों पर dependent है और अब तक $270 सिर्फ Belt and Road पर इंवेस्टमेंट कर चूका है।
अगर इस जंग में प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अमेरिका का साथ दे देते तो यह दुनिया के तेल और गैस की ज़रूरत के वजह कर WWIII तो नहीं होता मगर यह जंग ओबामा के अरब स्प्रिंग से बड़ी बर्बादी मिडिल ईस्ट ख़ास कर सऊदी अरब और ईरान का कर देता।

Arshad Rashid साहब क्या अयातुल्लाह खमेनेई के कारनामे भी उसी फेहरलिस्त में लिखें जाएंगे?

  • Mohammed Seemab Zaman हॉ, लिखा जाये गा क्योंकि वह “मार” दिये गये। अगर वह अपनी मौत मरते तो उन को कोई तारीख़ लिखने वाले याद नहीं करते।

Kamil Khan खेमनाइ के हम कभी समर्थक नहीं रहे, उनकी नीतियों की वजह से, सब से ज़्यादा ईरानी जनता ने दुख झेला और मिडिल ईस्ट में ईरान की वजह से कभी अमन न हो सका, मेरा ख्याल था के खेमनाइ को खामोशी से ईरान के ही लोग किनारे कर देंगे, क्योंकि मुस्लिम दुनिया और खास कर शिया फिरक़ा उनको बहुत अक़ीदत की नज़र से देखता है, पर आखिर में खेमनाइ ने जंग में अपनी शहादत दे कर तारीख में खुद को एक हीरो बना लिया, हम चाहे जितने खेमनाइ के विरोधी रहे हों, पर उनकी शहादत देने की नीति की तो तारीफ़ खुले दिल से करेंगे, बाकी प्रिंस सलमान और शि जिन पिंग और तुर्क सदर अभी जिंदा हैं इनकी नीतियों को तो हम पसंद करते है, पर फैसला तो फिलस्तीन की आज़ादी या इनकी मौत के बाद होगा,,के ये अच्छे थे या खराब थे,

  • Dilawar Khan Kamil Khan सहाब,, आप समझें ही नही,,, पिछले कई साल से खामनेई अरब देशों के साथ समन्वय बना कर चल रहे थे,,, जिसमे चीन का बड़ा रोल था,,, खामनेई ईरान को अरब के साथ मिला कर तरक्की की राह पर चलाना चाह रहे थे ,,, मिडिल ईस्ट अमन की राह पर चल रहा था,,,, बस ये चीज़ ही इजराइल को गवारा नहीं हुई.

सैफी आमिर, सर बहुत बेहतरीन लेख आपकी दुरं देशी बहुत बेहतरीन आपने अपनी किसी पोस्ट में जिक्र किया था कि चीन ने सऊदी अरब और ईरान में दोस्ती करा के शिया सुन्नी का मसला ही खत्म कर दिया शायद यही वजह रही इजराइल अमेरिका तो ईरान पर बमबारी करते रहे और अरब मुल्कों को उकसाते रहे कि इस जंग में वे भी शामिल हो लेकिन ईरान का ये कहना कि अरब मुल्क हमारे भाई हम उन पर बमबारी नही करेंगे लेकिन अरब मुल्कों में से कहीं से भी अमेरिका इजराइल ने अपने ठिकानों से हम पर अटैक किया तो हम उस जगह को पूरी तरह से बरबाद कर देंगे जिसका परिणाम ये हुआ अरब मुल्कों ने पलटवार नही किया और अरब मुल्कों में अमेरिकी ठिकानों को ईरान की मिसाइलों से कायदे से बरबाद होने दिया.

Salman Raza आखिर में जो आपने तीन नाम लिया है उसमें मोहम्मद बिन सलमान वाकई सुपर हीरो निकला जंपिंग का क्या कहना वह तो पैदा ही हुआ है हिस्ट्री लिखने के लिए.

xMozaffar Haque बहुत शानदार तज्ज़िया किया है आप ने।

  • Mohammed Seemab Zaman बहुत बहुत शुक्रिया। हम कई दिन से इस को लिखने को सोंच रहे थे, जब से Sun Tzu का यह पढ़ा था।मगर कल मेरे एक पुराने पोस्ट को Siraj Khan साहेब ने पोस्ट किया तो यह पोस्ट लिखा गया।

वाहिद समीर शेख Mohammed Seemab Zaman सर जी अपने झंडी लाल का क्या होगा इस पर भी रोशनी डालनी चाहिए थी

  • शमीमा शमीमा, वाहिद समीर शेख कही कोई भी समस्या आती है तो लोग नरेंद्र मोदी को याद करते हैं क्योंकि अमित शाह को पता है मोदी अपने में ही अपनों के बीच में ही विश्वगुरु है