The Post of 9th March 2026

“ए मोज दजला तू भी पहचानती है हम को
अब तक है तेरा दरिया अफसानह खॉ हमारा”

#1878: यह साल मुस्लिम की तारीख़ में एक cut off date की हैसियत रखता है। इसी साल यूरोप की साम्राज्यी ताक़तों ने मुस्लिम देशों का बंदर बांट शुरू किया। उसी साल यूरोप, अफ्रिका,मिडिल ईस्ट के देशों को कब्ज़ा शुरू किया।बोस्निया जो सल्तनत उस्मानिया का हिस्सा था उस को आसट्रिया को दे दिया, जो 1996 में क़तल व ग़ारत के बाद आज़ाद हुआ। बाक़ी का इतिहास लोग पढ़ लें।

#1923: इस साल पॉच सदी से चली आ रही सल्तनत उस्मानिया का ख़ात्मा हो गया और मुस्लिम की तेरह सौ साल का उरूज ख़त्म हो गया। सोवियत संघ में मुस्लिम का क़तल व ग़ारत और विस्थापन बड़े पैमाने में हुआ। आज जो यूक्रेन की लड़ाई हो रही है वहॉ के क्रिमियॉ के लाख लाख मुस्लिम को विस्थापित कर मार डाला, कज़ाखस्तान में एटम बम का समतल ज़मीन पर परिक्षण किया जहॉ, आज भी 65 साल बाद बच्चे सही सलामत पैदा नही होते हैं।

#1973: इस साल अरब-इसराइल जंग हुई और तेल पैदा करने वाले मुस्लिम देशों को तेल एक “Weapon & Wealth” मिला जबकि 1904 में ईरान में और 1939 में सऊदी अरब में तेल का ज़ख़ीरा निकला था।मुस्लिम देशों में ग़रीबी बहुत बढ़ गई, किसी के पास इतना पैसा नहीं था कि एक इंजिनियरींग या मेडिकल कालेज खोलें या कोई वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी खोले।अफ़्रीका में सभी देशों के पास तेल, यूरेनियम या रेयर अर्थ है मगर देख लिजिये क्या हाल है?

#2001: अरब और ईरान के तेल और पैसा से यूरोप द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सँभल गया और अमेरिका पिछले 60 साल तक विश्वगुरु बना रहा।मगर अचानक इसी साल 9/11 हो गया और अरब का पैसा वाला परिवार अपना पैसा अमेरिका और यूरोप से निकालने लगे और दुबई, क़तर, सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की, इंडोनेशिया में बड़े पैमाने मे निवेश कर तरक़्क़ी होने लगी।

1923 के बाद फिर से मुस्लिम देश पैर पर खड़े होने लगे।अफ़्रीका के देश मोरक्को, अल्जीरिया, सीरिया, सूडान वगैरह उभरने लगे मगर 2011 में ओबामा ने “अरब स्प्रिंग” कर एक धक्का लगा दिया और आज 15 साल बाद वह फिर stable हो गये। जिस में एक बड़ा सौ साल बाद एक यादगार बदलाव 2025 जनवरी मे सीरिया में आया, जो 1918 से फ्रांस के ग़लामी से 1946 मे आज़ाद होकर 1970 से असद ख़ानदान का ज़ुल्म सह रहा था। सीरिया के पास तेल और गैस का भंडार कुवैत से ज़्यादा है मगर असद ख़ानदान ने उस को निकाल कर तरक़्क़ी नहीं कराया।

#2026: इस साल 100-125 साल के बाद 2/28 की अमेरिका-इसराइल-ईरान की जंग अब सब कुछ बदल देगा। यह आखरी मार-काट मिडिल ईस्ट में हो रहा है मगर यह 1878 के बाद की न्यू वर्ल्ड आर्डर की धमक है, जिस को 1973 के जंग ने रास्ता हमवार किया और यह 2026 की जंग सैकड़ों साल के लिए फिर पायदारी दे गी।

#NOTE: 1973 जंग के बाद मुस्लिम को पैसा मिला, 9/11 के बाद तरक़्क़ी किया और 2026 के बाद दुनिया का Power Balance बदल जाये गा। यानि 1878 के पहले की दुनिया फिर होगी, मगर किस शक्ल में होगी, कैसे होगी वह अगला 25 साल बताये गा।
============
Some comments on the Post

Mohammed Seemab Zaman

“ए मोज दजला तू भी पहचानती है हम को
अब तक है तेरा दरिया अफसानह खॉ हमारा”

इक़बाल का यह कह कर केह “पहचानती है हम को” इस्लामी तारीख़ में एक बहुत बडे फ़ैसला कुन जंग का याद ताज़ा कर दी है। यह हज़रत उमर के दौर ख़िलाफ़त (634-645 AD) मे हज़रत साद बिन वक़ास ने जब इराक़ से ईरान पर हमला करने बढ़े तो रास्ता में दरिया दजला को पार करना था। उस को पार करने में दुश्वारी आई क्योंकि ईरानियों ने दरिया पर सभी पुल तोड़ दिये थे।

साद के पास इतना वक्त न था के वह पुल बनाते, तो उन्होंने दरिया के उस हिस्सा को तालाश किया जहॉ पानी कम था और वहॉ उस पानी मे अपना घोड़ा दौड़ा दिया और उन की फौज तीर से दुश्मनों को मार कर उन्हें शिकस्त दे दिया। तफ़सील मोहम्मद बदिऊज़्ज़मॉ साहेब ने अपनी किताब में लिखा है, इक़बाल के इस शेर को समझाने के लिए।

Kamil Khan, Mohammed Seemab Zaman सर जब कोई gcc की बरबादी की बात करता है, तब मुझे ऐसे ही कुछ तारीख के हिस्से याद आते है, अरबों के पास जब खोने को कुछ नहीं बचेगा, तो पाने को बहुत कुछ होगा, सीरिया का तख्ता पलट और शैख़ जुलानी का सदर बन जाना कोई मामूली घटना नहीं है.

Sandeep Solanki उस्मानिया सल्तनत का गिरना मेरे हिसाब से मुस्लिम दुनिया के लिए सबसे बड़ा धक्का था ……सुल्तान उस्मान सुल्तान BYEZID मुराद सुल्तान मोहम्मद फातेह सुल्तान अब्दुल हमीद सुल्तान और सुल्तान सलीम जैसे शख्स आज भी उस्मानिया सल्तनत पैदा करती.

Sarfaraz Nadwi Buhut buhut shukriya is tareekhi post k liye jo buhut kam words m h lekin kitaben apne ander samete huwe hai, jazakallah khair.

Arshad Rashid अगर अरब उस वक्त अमेरिकी टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल न करते तेल/गैस निकालने में तो आज उनके भी हालात अफ्रीका सीरिया जैसे होते… उस वक्त के हुक्मरानों ख़ास कर किंग अब्दुल अज़ीज़ बिन अल सऊद ने बहुत उम्दा काम किया था

  • Kamil Khan, Arshad Rashid कुछ लोगों को इतिहास भूगोल और तारीख के हालात मालूम नहीं होते, इनको भारत की ज़मीन और gcc की ज़मीन का फ़र्क़ नहीं पता, बस बकवास करते फिरते हैं.

Abdullah Haroon बहुत ही खूब लिखा सर आपने हमेशा की तरह मैं सिर्फ इन हालात को देखकर यह समझा हु की दुनिया में एक वर्ल्ड ऑर्डर इस्लाम के दुश्मनों ने बनाया था और एक 100 साल का प्लान अरबों ने तैयार किया था तेल निकालने के बाद जो अब अपने आखिरी मरहले में है और बहुत जल्दी इंशाअल्लाह खिलाफत दुनिया को याद आ जाएगी

  • Mohammed Seemab Zaman, Abdullah Haroon साहेब, लोग isolated हो कर सोंचता है और कहते और लिखते हैं कि “अरबों ने कुछ नही किया, या गद्दार हैं, या अक़ल नही है, वगैरह वगैरह” मगर कभी यह नही सोंचा की UAE की आबादी 50 लाख है, क़तर 15 लाख, सऊदी 1 करोड, कुवैत 50 लाख , इस से ज्यादा आबादी तो हिन्दुस्तान के कई शहर मे है। दूसरा यह कि अगर अमेरिका के $ मे तेल नही बेचता तो किस करेंसी मे बेचता, रूपया मे बेचता, रूबल में बेचता या जापान के करेंसी मे बेचता, जो उन को कुछ नही दे पाता। सवाये चंद टेक्नोलॉजी के। अमेरिका मे इन लोगो का पैसा multiply किया जिस के वजह कर आज यह ट्रम्प को $4-5 trillions मे निलाम करने लगे। बहुत कुछ लिखा जा सकता है मगर लोगो को समझ मे आये तो तब न।