The Post of 13 March 2026
दो हफ्ता हो गया मगर अमेरिका न ईरान की हुकूमत बदल सका न ही हुकूमत को सरेंडर करा सका बल्कि दुनिया में तेल और गैस का दाम तेज़ी से बढ़ गया, जो महीनो रहे गा।
इस लडाई में इतिहास में पहली बार, मिडिल ईस्ट के सभी तेल और गैस उत्पादक देशों ने तेल और गैस का कुऑ बंद कर दिया है। और अगर यह जंग कल बंद हो भी जाती है तब भी तेल और गैस का उत्पादन एक महीना तक असम्भव है क्योंकि तेल और गैस के कुओं से पुन: उत्पादन शुरू करने में महीनों का समय लगे गा।
*ट्रम्प प्रशासन ने लड़ाई शुरू करने के पहले शायद यह नही सोंचा था कि सऊदी अरब, क़तर, ईरान, इराक़ या कुवैत तेल और गैस के कुऑ को बंद कर दें गें क्योंकि कोरोना महामारी में भी तेल या गैस का कुऑ बंद नहीं हुआ था।
ट्रम्प के बेवक़ूफ़ी के कारण तेल और गैस के बढ़े दाम से दुनिया ख़ास कर यूरोप, अमेरिका तथा भारत की अर्थव्यवस्था जंग बंदी के बाद भी तबाह हो जाये क्योंकि तेल और गैस की सप्लाई तीन-चार महीना तक बाधित रहे गा।
*अमेरिकी प्रशासन के इतिहास की यह सब से बड़ी नाकामी है कि 1939 के बाद पहली बार पूरा मिडिल ईस्ट ट्रम्प के बेवक़ूफ़ी ने दशकों के लिए खो दिया जिस तरह से 1939 में सोवियत संध के स्टालिन ने अपने सऊदी अरब के राजदूत को क़त्ल कर 50 साल से अधिक समय के लिए सऊदी अरब को खो दिया था। (मेरा एक पुराना पोस्ट इस पर है)
उस पचास साल में जब सोवियत संघ टूट गया तब 1992 में फिर रूस का दूतावास रेयाद में खुला। डर है कि फिर वही इतिहास दोबारा कहीं अमेरिका के साथ ने दोहराया जाये।
#NOTE: इस जंग के बाद, अमेरिका को मिडिल ईस्ट छोड़ना होगा या ईरान के साथ रहने के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि ईरान इस जंग से एक लम्बा खेल खेल रहा है।नीचे एक ख़ूबसूरत रात की तस्वीर Strait of Hormuz में जहाज़ की है।
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Some comments on the Post
यह पोस्ट बहुत छोटा लिखा है मगर यह जंग हमारे या उन लोगों के ज़िंदगी की एक यादगार जंग है जिन लोगों ने द्वितीय विश्वयुद्ध (WWII) नहीं देखा है। यह जंग आज़ादी के बाद के भारत को निश्चित रूप से बदल कर रख दे गा, सौ साल की सोंच अपने बुद्धिजीवियों के सोंच पर मातम करे गी।
मेरे याद मे दुनिया के तीन नेताओं ने blunder किया और वह अपने ऊरूज से ज़वाल को पहुंचे। पहला यासिर अराफ़ात जिनहोने Gulf War मे सद्दाम का साथ दिया और बग़दाद गये; दूसरा ईमरान खान जो रूस-यूक्रेन वार मे 4 March 2022 को Moscow पुटिन से जा कर मिले; तीसरे मोदी जो अमेरिका-इसराइल -ईरान जंग के पहले 25 February 2026 को तेल अव्वि चले गये।
- Shadab Zafar, Mohammed Seemab Zaman बतौर एक भारतीय नागरिक क्या precautions लेने चाहिए हम लोगों को.
- Mohammed Seemab Zaman, Shadab Zafar साहेब, चुप चाप से तमाशा देखये, फ़ज़ूल खर्ची बंद करिये। लकड़ी, कोयला का इंतज़ाम कर लिजये, गैस के चक्कर मे नही पड़िये।
Shekh Shakil Alam, Mohammed Seemab Zaman सर मुझे लगता है भारत को ज्यादा नुकसान और मुल्कों के बनिस्बत क्यों कि भारत थाली का बैंगन बना रहा कभी रूस कभी चीन कभी बांग्लादेश, कभी अमेरिका तो कभी इजरायल गहरी दोस्ती किसी के साथ नहीं नतीजा आज भारत के साथ भी कोई नहीं है ऐसा ही रहा तो भारत बहुत जल्द मिडिलईस्ट भी खो देगा जो भारत के लिए बहुत नुकसान देह होगा.
Dilawar Khan बहुत खूब,, जी बिल्कुल सर,,, इस जंग से सबसे बड़ा फ़ायदा ये होगा कि अंधे हो चुके दिल मुस्लिम दुनियां की ताकत का अहसास करेगे,, विश्व का 90% सामान समुंद्री मार्गो से गुजरता है ईरान ने सिर्फ अपने एक रास्ते स्ट्रेट होरमुज को बंद किया है,,, जबकि दुनियां के सबसे बड़े और ज़्यादा सप्लाई देने वाले जल मार्ग मुस्लिम देशों के पास है.
स्ट्रेट हार्मुज
बाब अल मंदब
स्वेज कनाल
स्ट्रेट ऑफ मलक्का
स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर
तुर्की जलडमरूमध्य (Turkish Straits)
काला सागर मार्ग:
भूमध्य सागर/एजियन मार्ग:
इस्तांबुल नहर
नील नदी और अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह (मिस्र)
मोंजाबिक चैनल
गल्फ ऑफ घाना
Kadar Khan अभी तो गैस पेट्रोल डीजल की समस्या को देखते हुए मोदी को तुरंत प्रभाव से ईरान को फादर लैंड बनाने की घोषणा करना चाहिए और वहां जाकर किसी भी नेता के गले पड़कर हा हा हा खी खी खी करना पड़ेगा वरना वो बंगला देश को जहाज निकालने दे रहे हैं और हमारे 37 रोक दिए हैं। अगर संभव हो सके तो वहां जाकर डांस वगैरह भी किया जा सकता है देशहित में टांगें खोल कर भी विदेश नीति चलाई जा सकती है.
ऐन्टीटोड गेमर वेनेज़ुएला को चट से हथिया कर ईरान को भी उसी लय में नापने की कोशिश थी। ईरान के प्राक्सी और सेना के तीस लेयर और समुद्री तैयारियों को इसने अध्यन नहीं किया।और पूरी दुनिया में रूसवा हो गया।
ईरान ने दुनिया को युद्ध का नया तरीक़ा पेश किया है जो शाय़द अभी तक यह विचार किसी के पास नहीं थे। यही कारण है कि अमरीका भागने का रास्ता ढूंढ रहा है। अभी ईरान की सभी शर्तों को भी मानना पड़ेगा। अहम यह की यहूदी आफिस का भी सफ़ाया दसकों तक जारी रहेगा। यहूदियों का आखिरी ठिकाना भारत है। हिमाचल प्रदेश से शुरूआत होगी।
Syed Shaad सर इस समय तो लग रहा है देश में विपक्ष के पास भी एक भी बुद्धिजीवी नहीं बचा है, जो ये संघ के लोगों से मुखर होकर कह सके कि आज देश मुस्लिम नफरत की कीमत चुका रहा है। यहां तक कि इस पर देश का कोई भी बुद्धिजीवी बात करने को तैयार नहीं है।
Abdul Raheem Trump ने अमेरिका का down fall, 20 साल पहले ही करा दिया. ये लड़ाई एक हफ़्ता से ज़्यादा चल गयी, अब अमेरिका इस लायक नही रहेगा कि कहीं और दखल दे. Taiwan का ऊँट किस करवट बैठेगा, ये भी तय हो गया. This will prove it as the final nail in America’s coffin, all thanks for Trump’s hubris. बाक़ी, For India, dangerous times lie ahead. Reckoning won’t be easy at all, nor should it be.
Kamil Khan इस जंग की खूबी ये है के दुनिया से कंफ्यूज़न खत्म होगा, अरब क्या हैं ईरान क्या है रूस अमेरिका चीन क्या है, और साथ में भारत के बहुसंख्यक भी अब खुली आँख से दुनिया का सच देखेंगे और सुविकार भी करेंगे.
Muhammad Aslam Shaikh सर अख़बार में पड़े है की संघ तारीखी बदलाव करने वाले है कही आपकी बात संघ तक पहुंच गई है क्या संघ को 100 साल की सोच को बदलना होगा अब देखते है की बदलाव दंगा नवनी वाला होगा या कुछ नया होगा
- Mohammed Seemab Zaman, संघी बुद्धिजीवियों के पास अब कोई चारा नही बचा, इन को धीरे धीरे अपने को बदलना हो गा। यह लोग मलेशिया से अमेरिका तक Note कर लिये गये हैं और इन लोगो पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।
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